फलाहारी कचोरी

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फलाहारी कचोरी (फलाहारी कचोरी) गुजरात का एक बहुत ही शाही, कुरकुरा और लोकप्रिय पारंपरिक व्रत का व्यंजन है जिसे आलुओं और साबूदाने के राजसी कवच व नारियल-मूंगफली के भरावन (स्टफिंग) से बनाया जाता है। यह अपनी बेहतरीन गोल बनावट, लाजवाब तीखे-मीठे स्वाद और व्रत के एक अनिवार्य शाही 'फरसाण' के रूप में दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसे अक्सर उपवास के दौरान मुख्य नाश्ते के रूप में परोसा जाता है। इसमें आलुओं के बाहरी हिस्से में नारियल, मूंगफली और किशमिश का राजसी मिश्रण भरकर तला जाता है। इसका स्वाद बहुत ही दमदार, सोंधा और लाजवाब होता है। अदरक-मिर्च और नींबू का रस इसे एक विशेष और राजसी पहचान देते हैं। फलाहारी कचोरी का हर कौर परंपरा और स्वाद का एक बहुत ही यादगार और शाही अनुभव देता है।
सामग्री
बनाने की विधि
टिप्स और सीक्रेट्स
- सबसे बेहतरीन स्वाद के लिए हमेशा ताज़े नारियल और मीठी किशमिश का ही चुनाव करें, यह सबसे होता है।
- आलुओं में गुठलियाँ नहीं होनी चाहिए।
- कचोरियों को धीमी आंच पर ही तलें।
- यह उन लोगों के लिए सबसे लाजवाब नाश्ता है जो व्रत में शाही और चटपटी गुजराती कचोरी का स्वाद लेना चाहते हैं।
पोषण संबंधी जानकारी(प्रति 2 pieces (120g))
310 kcal
6g
20g
28g
नोट: पोषण संबंधी मान एक मानक सर्विंग (~200-250 ग्राम / मिली) के लिए पेशेवर अनुमान हैं और सामग्री की गुणवत्ता और बनाने की विधि के आधार पर भिन्न हो सकते हैं।
