फराली चिवड़ा

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फराली चिवड़ा गुजरात का एक बहुत ही शाही और लोकप्रिय पारंपरिक नाश्ता है जिसे आलू के लच्छों, मूंगफली और राजसी मेवों के मेल से बनाया जाता है। यह अपनी बेहतरीन सुनहरी बनावट, लाजवाब सोंधी खुशबू और उपवास के लिए विशेष उपयोग के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसे अक्सर व्रत के दौरान एक पसंदीदा और राजसी कुरकुरे स्नैक के रूप में खाया जाता है। इसमें आलू को बारीक लच्छों में काटकर डीप-फ्राई किया जाता है और फिर उसमें काजू, किशमिश और मसालों का मिश्रण मिलाया जाता है। इसका स्वाद बहुत ही दमदार, चटपटा और लाजवाब होता है। सेंधा नमक इसे एक विशेष और राजसी पहचान देता है। फराली चिवड़ा का हर कौर परंपरा और चटाखे का एक बहुत ही यादगार और शाही अनुभव देता है।
सामग्री
बनाने की विधि
टिप्स और सीक्रेट्स
- सबसे बेहतरीन स्वाद के लिए हमेशा पुराने आलुओं और शुद्ध तेल का ही चुनाव करें, यह सबसे होता है।
- लच्छों को धोने के बाद पूरी तरह सुखाना बहुत ज़रूरी है, यही उसकी कुरकुराहट का राज है।
- चीनी और मिर्च का संतुलन ही उसे पहचान देता है।
- यह उन लोगों के लिए सबसे लाजवाब नाश्ता है जो उपवास में भी कुरकुरा स्वाद पसंद करते हैं।
पोषण संबंधी जानकारी(प्रति 100g portion)
480 kcal
5g
36g
34g
नोट: पोषण संबंधी मान एक मानक सर्विंग (~200-250 ग्राम / मिली) के लिए पेशेवर अनुमान हैं और सामग्री की गुणवत्ता और बनाने की विधि के आधार पर भिन्न हो सकते हैं।
