गजरेला

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गजरेला, जिसे गाजर के हलवे के नाम से भी जाना जाता है, उत्तर भारत का सबसे प्रसिद्ध और पसंदीदा शीतकालीन मिठाई है। इसमें सर्दियों की मीठी लाल गाजरों को मलाईदार दूध में तब तक पकाया जाता है जब तक कि वे पूरी तरह से नरम न हो जाएं। इसके बाद गाजरों को शुद्ध देसी घी में भूना जाता है और इसमें खोया, इलायची व ढेर सारे मेवे मिलाए जाते हैं। यह मिठाई अपनी समृद्धि, गहरे नारंगी रंग और लाजवाब खुशबू के लिए जानी जाती है। गजरेला हर पंजाबी उत्सव और सर्दियों की दावतों की जान होती है। इसका हर कौर परंपरा और मिठास का एक बहुत ही यादगार अनुभव देता है।
सामग्री
बनाने की विधि
टिप्स और सीक्रेट्स
- सर्दियों वाली लाल गाजर का ही उपयोग करें, इससे हलवे का रंग और स्वाद बहुत ही विशेष आता है।
- दूध सूखने के बाद घी में भूनना ही असली गजरेला बनाने का राज है।
- खोया अंत में ही डालें ताकि उसकी दानेदार बनावट बनी रहे।
- भारी तले की कड़ाही का ही प्रयोग करें ताकि दूध जले नहीं।
पोषण संबंधी जानकारी(प्रति 1 portion (150g))
420 kcal
8g
22g
48g
नोट: पोषण संबंधी मान एक मानक सर्विंग (~200-250 ग्राम / मिली) के लिए पेशेवर अनुमान हैं और सामग्री की गुणवत्ता और बनाने की विधि के आधार पर भिन्न हो सकते हैं।
