घेवर

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घेवर (Ghevar) राजस्थान की एक बहुत ही शाही, जालीदार और पारंपरिक मिठाई है जो अपने अनोखे चक्राकार आकार और बनावट के लिए जानी जाती है। इसे मैदा और घी के पतले घोल को उबलते हुए घी में बड़ी सावधानी से डालकर बनाया जाता है, जिससे इसमें मधुमक्खी के छत्ते जैसी सुंदर जाली बनती है। इसका स्वाद बहुत ही दमदार, मीठा और लाजवाब होता है। यह राजस्थान के तीज और रक्षाबंधन के त्यौहारों का एक अनिवार्य हिस्सा है। चीनी की चाशनी इसे एक बेहतरीन चमक देती है। गरमागरम या ठंडी रबड़ी के साथ परोसा गया घेवर राजपूताना विरासत का एक अनमोल हिस्सा है।
सामग्री
बनाने की विधि
टिप्स और सीक्रेट्स
- घोल बनाने के लिए हमेशा बर्फ जैसे ठंडे पानी और दूध का ही उपयोग करें, इसी से अच्छी जाली बनती है।
- घोल डालने से पहले सुनिश्चित करें कि घी बहुत तेज़ गरम हो, तभी वह बिखरकर जाली का रूप लेगा।
- चाशनी में केसर के धागे ज़रूर डालें, यह घेवर को एक बहुत ही शाही रंग और खुशबू देता है।
- घेवर बनाने के लिए हमेशा गहरे और कम चौड़े बर्तन का चुनाव करें ताकि घेवर मोटा और सुंदर बने।
पोषण संबंधी जानकारी(प्रति 1 piece (120g))
420 kcal
4g
24g
48g
नोट: पोषण संबंधी मान एक मानक सर्विंग (~200-250 ग्राम / मिली) के लिए पेशेवर अनुमान हैं और सामग्री की गुणवत्ता और बनाने की विधि के आधार पर भिन्न हो सकते हैं।
