हुरडा

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महाराष्ट्र की मिट्टी और सर्दियों की फसल की सोंधी महक है हुर्डा (Hurda), जिसे ताज़ी और कोमल हरी ज्वार के दानों के रूप में जाना जाता है। यह कोई साधारण अनाज नहीं, बल्कि एक मौसमी उपहार है जिसे ज्वार के पूरी तरह पकने से पहले, उसकी सबसे रसीली अवस्था में काटा जाता है। इसे पारंपरिक तरीके से बनाने के लिए ज्वार की बालियों को कोयले की धीमी आँच पर भुना जाता है और फिर झटककर इसके नरम व मीठे दाने निकाले जाते हैं। भुने हुए अनाज के मुकाबले, हुर्डा अपने प्राकृतिक दूधिया स्वाद और धुएँ जैसी (smoky) खुशबू के लिए मशहूर है। फाइबर और आयरन से भरपूर होने के कारण यह एक अत्यंत पौष्टिक शाकाहारी सुपरफूड है, जो केवल सर्दियों के कुछ महीनों में ही उपलब्ध होता है। इसे तीखी लहसुन की चटनी, गुड़ और दही के साथ खेतों में बैठकर खाने का एक अलग ही आनंद है। इस पारंपरिक महाराष्ट्रीयन स्वाद के साथ प्रकृति की सादगी का अनुभव करें।
सामग्री
बनाने की विधि
टिप्स और सीक्रेट्स
- हुरडा को हमेशा कोयले की आंच पर भूनना ही सबसे अनुभव देता है।
- इसे भूनने के तुरंत बाद ही खाएं, यही उसकी कोमलता का राज है।
- स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें थोड़ा काला नमक और चाट मसाला भी डाला जा सकता है।
- इसे तीखे ठेचे और गुड़ के साथ खाना एक शाही और पारंपरिक दावत जैसा होता है।
पोषण संबंधी जानकारी(प्रति 1 serving)
180 kcal
6g
2g
36g
नोट: पोषण संबंधी मान एक मानक सर्विंग (~200-250 ग्राम / मिली) के लिए पेशेवर अनुमान हैं और सामग्री की गुणवत्ता और बनाने की विधि के आधार पर भिन्न हो सकते हैं।
