जोलदा रोटी

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जोलदा रोटी (ज्वार की रोटी) उत्तरी कर्नाटक का एक बहुत ही शाही और सेहतमंद भोजन है जो अपनी पारंपरिक बनावट के लिए जाना जाता है। इसे ज्वार के आटे से बनाया जाता है जो पूरी तरह से ग्लूटेन-फ्री होता है। इसे बेलने के बजाय हाथों से थपथपाकर पतला बनाया जाता है और तेज़ आंच पर सेंका जाता है। इसका स्वाद बहुत ही सोंधा और लाजवाब होता है। यह ग्रामीण भारत के पौष्टिक खानपान की असली पहचान है। इसे अक्सर तीखी 'एन्नेगई' (भरवा बैंगन) और लहसुन की चटनी के साथ खाया जाता है। यह रोटी न केवल स्वादिष्ट है बल्कि पाचन और ऊर्जा के लिए भी बहुत अच्छी मानी जाती है।
सामग्री
बनाने की विधि
टिप्स और सीक्रेट्स
- ज्वार का आटा ताज़ा पिसा हुआ होना चाहिए, पुराना आटा रोटी बनाते समय फट सकता है।
- पानी बिल्कुल खौलता हुआ लें, यही आटे को सही तरीके से पकाने का राज है।
- थपथपाते समय हाथों का दबाव हल्का रखें ताकि रोटी एक समान पतली बने।
- रोटी पर पानी लगाना ज़रूरी है, इससे वह कड़क नहीं होती और उस पर सुंदर सफेद निशान आते हैं।
पोषण संबंधी जानकारी(प्रति 1 roti (80g))
160 kcal
5g
2g
32g
नोट: पोषण संबंधी मान एक मानक सर्विंग (~200-250 ग्राम / मिली) के लिए पेशेवर अनुमान हैं और सामग्री की गुणवत्ता और बनाने की विधि के आधार पर भिन्न हो सकते हैं।
