काफुली

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काफुली (Kafuli) उत्तराखंड की एक बहुत ही शाही, सौम्य और पारंपरिक सर्दियों की डिश है जो मुख्य रूप से पालक और मूली के पत्तों से बनाई जाती है। इसे 'पहाड़ी साग' भी कहा जाता है। इसमें ताज़ा हरी पत्तियों को चावल के पेस्ट (बिसवार) और सोंधे मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है। इसका स्वाद बहुत ही ताज़गी भरा, शुद्ध और लाजवाब होता है। यह उत्तराखंड का सबसे पौष्टिक और पसंदीदा भोजन माना जाता है। अदरक और लहसुन का सोंधापन इसे एक विशेष पहचान देता है। गरमागरम काफुली और भात (चावल) का मेल एक बहुत ही सुकून भरा और शाही अनुभव है।
सामग्री
बनाने की विधि
टिप्स और सीक्रेट्स
- सबसे बेहतरीन स्वाद के लिए हमेशा ताज़ा और कोमल पालक व मूली के पत्तों का ही चुनाव करें।
- चावल का पेस्ट (बिसवार) बिल्कुल चिकना होना चाहिए, तभी काफुली मखमली बनेगी।
- मूली के पत्ते ज़रूर डालें, वे साग को एक बहुत ही शाही और पारंपरिक पहाड़ी स्वाद देते हैं।
- इसे लोहे की कड़ाही में ही बनाएं, इससे काफुली का रंग गहरा और स्वाद सोंधा हो जाता है।
पोषण संबंधी जानकारी(प्रति 1 bowl (200ml))
150 kcal
6g
9g
14g
नोट: पोषण संबंधी मान एक मानक सर्विंग (~200-250 ग्राम / मिली) के लिए पेशेवर अनुमान हैं और सामग्री की गुणवत्ता और बनाने की विधि के आधार पर भिन्न हो सकते हैं।
