कलमी वड़ा

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कलमी वड़ा (कलमी वड़ा) राजस्थान का एक बहुत ही शाही, पारंपरिक और अत्यंत कुरकुरा व्यंजन है जिसे दाल के वड़ों को दो बार तलने की राजसी कला के लिए जाना जाता है। यह अपनी बेहतरीन बनावट, लाजवाब सोंधे स्वाद और राजस्थानी चाय के नाश्ते के एक अनिवार्य शाही 'कुरकुरे व्यंजन' के रूप में दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसमें चना दाल के मिश्रण को वड़ों का आकार देकर तला जाता है, फिर उनके राजसी 'कलम' (स्ट्रिप्स) काटकर दोबारा तला जाता है। इसका स्वाद बहुत ही दमदार, चटपटा और लाजवाब होता है। सौंफ और हींग इसे एक विशेष और राजसी पहचान देते हैं। कलमी वड़ा का हर निवाला परंपरा और कुरकुराहट का एक बहुत ही यादगार और शाही अनुभव देता है।
सामग्री
बनाने की विधि
टिप्स और सीक्रेट्स
- दाल को दरदरा ही पीसें, बारीक न करें।
- सौंफ को कूटकर ही डालें, यही उसके स्वाद का राज है।
- दोबारा तलना बहुत ज़रूरी है ताकि वे अंदर तक कुरकुरे बनें।
- इसे शाम की चाय के साथ खाना सबसे शाही तरीका है।
पोषण संबंधी जानकारी(प्रति 150g portion)
210 kcal
9g
11g
22g
नोट: पोषण संबंधी मान एक मानक सर्विंग (~200-250 ग्राम / मिली) के लिए पेशेवर अनुमान हैं और सामग्री की गुणवत्ता और बनाने की विधि के आधार पर भिन्न हो सकते हैं।
