करेला साग

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करेला साग भारत के पूर्वी इलाकों का एक बहुत ही अनोखा व्यंजन है जिसमें करेले के फल के बजाय उसकी कोमल पत्तियों का उपयोग किया जाता है। यह डिश अपने औषधीय गुणों के लिए बहुत प्रसिद्ध है। हम इसे आमतौर पर बहुत ही कम मसालों के साथ बनाते हैं ताकि पत्तियों का अपना स्वाद बना रहे। इसका स्वाद शुरुआत में थोड़ा कड़वा लेकिन बाद में बहुत ही सोंधा महसूस होता है। यह गाँव की रसोई की सादगी और स्वास्थ्य का एक बेहतरीन मेल है। इसे चावल के साथ भोजन की शुरुआत में खाना बहुत ही अच्छा माना जाता है।
सामग्री
बनाने की विधि
टिप्स और सीक्रेट्स
- नमक हमेशा अंत में डालें क्योंकि पकने के बाद साग की मात्रा काफी कम हो जाती है।
- साग पकाते समय ढक्कन न लगाएं, इससे उसका हरा रंग बना रहता है।
- हमेशा कोमल पत्तियों का ही चुनाव करें, पुरानी पत्तियां बहुत ज़्यादा कड़वी हो सकती हैं।
पोषण संबंधी जानकारी(प्रति 150g)
85 kcal
3g
5g
6g
नोट: पोषण संबंधी मान एक मानक सर्विंग (~200-250 ग्राम / मिली) के लिए पेशेवर अनुमान हैं और सामग्री की गुणवत्ता और बनाने की विधि के आधार पर भिन्न हो सकते हैं।
